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Mahagathbandhan jan vishwas maharally on march 3

 

 Mahagathbandhan Jan Vishwas

हैलो दोस्तो आज के समय हर एक इंसान को पता है बीजेपी ने किस प्रकार अपना काम किया है, लेकिन कुछ ऐसे पार्टी है जो उनके काम से सहमत नहीं तो आज मैं आपको उन पार्टियो के बारे में बताने जा रहा हु, जो  Mahagathbandhan jan vishwas की रैली पटना में मार्च को निकलेगी। 

Mahagathbandhan jan vishwas maharally on march 3
  • Introduction:

तो दोस्तो बता दे की एक ही मंच पर दिखेंगे कोंग्रेस के लीडर राहुल गांधी, आरजेडी के नेता लालू प्रसाद, तेजस्वी यादव। तो महागठबंधन में शामिल पार्टियो ने ऐलान किया है कि पटना के गांधी मैदान में 3 मार्च को जन विश्वास महारैली करेंगे। इस घोषणा के साथ ही यह साफ हो गया है कि इंडिया गठबंधन का वजूद धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। महागठबंधन कि रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद, नेता विरोधी दल व पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव समेत लेफ्ट के बड़े नेता शामिल होंगे। जबकि, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अलग राग अलाप रही हैं। 

  • नितीश कुमार का क्या कहना है Mahagathbandhan jan vishwas pe ?
Mahagathbandhan jan vishwas maharally on march 3

नितीश कुमार: 
नितीश कुमार ने भी अपना राजनीतिक तेवर दिखा दिया है। वे जिस नरेंद्र मोदी की रथ को रोकने के लिए बीजेपी विरोधी पार्टियों को एकजुट कर रहे थे, उसी नरेंद्र मोदी और बीजेपी के साथ हो लिए। अब इंडिया गठबंधन का स्वरूप ही भंग हो गया है। महागठबंधन ही बीजेपी को रोकने के लिए आगे है। 

  • शिवानंद तिवारी को पहले ही आशंका थी Mahagathbandhan jan vishwas रैली निकालने की
Mahagathbandhan jan vishwas maharally on march 3

शिवनंद तिवारी: 
ऐसी राजनीतिक स्थिति की आशंका शिवानंद तिवारी जैसे पुराने नेता को भी पता था। उनहोंने लालू प्रसाद की मौजूदगी में मंच से कहा था कि बीजेपी विरोधियों पार्टियों को एकजुट करना तराजू पर मेढक तौलने कि समान है। हालांकि, विपक्षी एकजुटता के खिलाफ वे नहीं रहीं। लेकिन, उनकी आशंका आज जमीन पर दिख रही है। इस मायने में वो आगे की सोच रखने वाले नेता साबित हुए। 

  • इंडिया गठबंधन में कुछ फिट नहीं बैठे, कुछ ठगे गए-बीजेपी 

वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता कुंतल कृष्ण कहते हैं कि गठबंधन इंडिया तो कभी राजनीतिक गठबंधन था ही नहीं। किसी भी राजनीतिक गठबंधन की कुछ सिद्धांत होते हैं। इनकी कोई साझा नीति रही ही नहीं, ये तो कुछ परिवारवादीयों का ठगबंधन है। समय से पहले एक-दूसरे को ठगने में यह गठबंधन टूट गया है। कुछ इसमें फिट नहीं रहे, इसलिए अलग हो गए। कुछ इसलिए अलग हुए, क्योंकि खुद ठगे गए। 

बिहार में अब यह पुराने रूप में है। पिछले लोकसभा चुनाव में पुराने महागठबंधन को बिहार की जनता ने कैसे वोट दिया था, वह सभी जानते हैं। इस बार बिहार से चालीस की चालीस सीटें एनडीए के जिम्मे होगी। 

  • अब महागठबंधन ही बचा है, इसलिए Mahagathbandhan jan vishwas रैली से फायदा होगा 

राजनीतिक विष्लेषक प्रवीण बागी कहते हैं कि अब तो इंडिया गठबंधन रहा ही नहीं, महागठबंधन बचा हुआ है। इंडिया गठबंधन के सूत्रधार नितीश कुमार थे। वे एनडीए के साथ चले गए हैं। पुराने महागठबंधन की रैली ही पटना के गांधी मैदान में 3 मार्च को होनी है। ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल ने इंडिया गठबंधन से खुद को अलग कर लिया है। 

अखिलेश यादव को कोई आधार बिहार में नहीं है। अगर उन्हें बिहार बुलाया जाता है तो वे भी कुछ सीटें मांगने लगेंगे। वे कहते हैं कि रैलीयां चुनाव के समय पार्टियों करती हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में जोश आता है। नेताओं को सुप्रीमो के सामने ताकत दिखाने का मौका मिलता है। जनता की संपर्क में भी नेता आते हैं और अपने मुद्दे बनाते हैं। इसलिए ऐसी रैलियों का फाइदा होता है।  

  • Conclusion:

तो दोस्तो मैं उम्मीद करता हूँ, कि आपको इस लेख में जो आप Mahagathbandhan jan vishwas के बारे में जो जानना चाहते थे। वो आपको इस लेख में पढ़ने को मिला हो। अगर आपके पास किसी प्रकार को सवाल हो इस लेख से जूरी तो आप हमे जरूर पूछ सकते है। कमेंट के द्वारा 

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